प्राकृतिक चिकित्सा का मूल आधार प्रकृति है : सरबनी राय

खोरीबाड़ी। देशभर में प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के उद्धेश्य से आयुष मंत्रालय भारत सरकार की संस्था नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ नचुरौपैथी के सौजन्य से इंटरनेशनल नैचरोपैथी ऑर्गनाइजेशन व सूर्या फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में दोहागुड़ी में प्राकृतिक चिकित्सा एंव परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक विनोद महतो ने बताया कि भारत सरकार के आयुष मंत्रलय के सौजन्य से सूर्या फाउंडेशन द्वारा प्राकृतिक चिकित्सा – संपूर्ण आयुर्वेद के विषय पर देश भर में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दार्जिलिंग जिले के दोहागुङी में भी यह कार्यक्रम किया गया। शिविर में बोलते हुए प्राकृतिक चिकित्सक सरबनी राय ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा का मूल आधार प्रकृति है। इसमें मिट्टी, पानी, धूप, हवा के माध्यम से ही व्यक्ति का उपचार किया जाता है। चिकित्सा का मूल सिद्धांत यही है। व्यक्ति 100 वर्ष तक निरोग रहने के लिए बना है। प्रकृति के मूलभूत पंच तत्व के साथ समायोजन कर जीवन यापन करना हमारा दैनिक भोजन में कच्चा आहार जैसे अंकुरित, मौसम के अनुकूल फल आदि का सेवन अधिकता के साथ करना चाहिए। दैनिक जीवन में योगाभ्यास, ध्यान, प्राणायाम के साथ-साथ सप्ताह में एक दिन उपवास भी रखना चाहिए। उपवास रखने के करण हमारे शरीर में जो भोजन पचने से रह गया है उसका पाचन हो जाता है तथा शरीर में पाचक अंगो को विश्राम करने का समय भी मिल जाता है। जिसे वह सब अंग अधिकाधिक सुचारू रूप से कार्य कर सके। दुर्गा मुर्मू ने कहा कि हम प्राकृतिक चिकित्सा को ध्यान में रखते हुए गांव में इस दिशा में मिलकर प्रयास करेंगे। इस दिशा में हमारा हर संभव सहयोग रहेगा। आए हुए अतिथियों का राजेश सिंह ने आभार व्यक्त किया। आज के कार्यक्रम में विधायक दुर्गा मुर्मू, वनवासी कल्याण आश्रम प्रांत अध्यक्ष कमल पुंगलिया, मनीष सरकार, मीना सिंह, डॉ बाबुल सिंह, रमेश सिंह, विमल सिंघा, पुष्पेन्दु बर्मन, राजेश वर्मन, भीख पुरी गोस्वामी, सोबिंद बर्मन, तरुन सिंह सहित अनेक महिलाएं तथा पुरुषों की सहभागिता रही।

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