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बेटे को असाध्य रोग से बचाने में मदद करने के लिए माता पिता ने गुहार लगाया

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खोरीबाड़ी । अपने बेटे को असाध्य रोग से बचाने में मदद करने के लिए माता पिता ने गुहार लगाया है । वाकया खोरीबाड़ी प्रखंड के फुलबोड़जोत निवासी धीरज प्रसाद का 10 वर्षीय देव प्रसाद का है । देव प्रसाद पिछले तीन साल से ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) से पीड़ित हैं। पिता धीरज प्रसाद बाजार में पुराने कपड़े बेचते हैं। वह अपने बच्चे के चिकित्सा खर्च उठाने में असमर्थ है। धीरज प्रसाद का बाजार में पुराने कपड़े बेचने का कारोबार है । 10 साल का देव प्रसाद फिलहाल चौथी कक्षा का छात्र है। विशेष जानकारी देते हुए धीरज प्रसाद ने बताया कि तीन सालों से देव प्रसाद को चलने में दिक्कत है । बिस्तर पर या जमीन पर बैठने से उसका उठना मुश्किल है । सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते या नीचे उतरते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा । लड़के की परेशानी को देखते हुए पहले उसे खोरीबाड़ी ग्रामीण अस्पताल ले गए । तत्पश्चात इलाज के लिए उसे उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया । सुधार नहीं होने पर सिलीगुड़ी के एक निजी अस्पताल में एक साल इलाज किया गया । फिर भी स्वास्थ्य अवस्था ठीक नहीं होने पर के उसे पटना के एम्स ले गए। मां गुड़िया गुप्ता प्रसाद ने कहा कि उन्हें एम्स में डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) होने का पता चला । चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी का अभी तक कोई खास इलाज नहीं है। इस बीमारी को नियंत्रित करने के अलावा फिलहाल कोई इलाज नहीं है। इसके बाद देव प्रसाद को इलाज के लिए लखनऊ के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। निजी अस्पताल के डॉक्टर ने बॉन मैरो मैनेजमेंट के जरिए डीएमडी रोग पर नियंत्रण करने की सलाह दी। निजी अस्पताल ने बॉन मैरो मैनेजमेंट के जरिए इलाज में करीब नौ लाख 20 हजार रुपये का खर्च का अनुमान दिया था। इस बीच, अपने बेटे के इलाज के लिए विभिन्न माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेने के बाद, परिवार की आर्थिक स्थिति चरमरा गई । आर्थिक समस्या के कारण इलाज किए बिना घर लौट आए । इसके बाद वे हाल ही में दार्जिलिंग सांसद राजू बिष्ट के सहयोग से इलाज के लिए दिल्ली के एम्स गए थे। लड़के को लगातार तीन महीने तक इलाज के लिए ले जाना पड़ता है। गुड़िया देवी ने कहा आर्थिक समस्या के कारण दिल्ली जाना या वहां रहकर इलाज करवाना साथ ही दवा खरीदना भी अब संभव नहीं है । इस बीच पति का धंधा बेकार हो चला है । वहीं डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। बीमारी और अधिक नहीं फैले मद्देनजर इलाज किया जा रहा है । उक्त रोग चिकित्सा अनुसंधान के अधीन है। पैसे की कमी के कारण बॉन मैरो मैनेजमेंट नहीं कर सकती। अब तो लड़के की टांगें मुड़ने लगी हैं । असहाय माता पिता ने सभी से लड़के को बचाने में मदद करने की गुहार लगाया है । वहीं खोरीबाड़ी प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सफीउल आलम ने बताया कि ‘ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ (डीएमडी) एक असाध्य आनुवंशिक बीमारी है । इस बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं है। स्टेरॉयड या बॉन मैरो मैनेजमेंट के जरिए इस बीमारी को कुछ समय के लिए कंट्रोल किया जा सकता है। इस बीमारी को नियंत्रित करना बहुत महंगा है। फिलहाल इस बीमारी के इलाज पर शोध चल रहा है।

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