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सरकार की ओर से किसानों को कई योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाया जा रहा है

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खोरीबाड़ी। सरकारों की ओर से किसानों की आय बढ़ाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार की ओर से किसानों को कई योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि किसान परंपरागत खेती की जगह बाजार की मांग पर आधारित खेती करने पर जोर दे ताकि उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सके। ये बाते उद्यान निदेशक नंदकिशोर ने रविवार को कही । वे बिहार में ड्रेगन फ्रूट के पहले उत्पादक किसान नागराज नखत के फार्म के दौरे के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे । इसी क्रम में उन्होंने कहा की  बिहार सरकार की ओर से किसानों को बागवानी फसलों पर सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए किसानों को सब्सिडी का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। इसके उत्पादन के लिए राज्य सरकार की ओर से एक हैक्टेयर के लिए निर्धारति लागत एक लाख 25 हजार रुपये में 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है ,उन्होंने कहा की सूबे ने ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर हैं, क्योंकि इनकी बाजार मांग अच्छी रहती है और इसके भाव भी अन्य फलों की अपेक्षा ऊंचे मिलते हैं जिससे किसानों को फायदा होगा। बता दें कि ड्रेगन फ्रूट मानसून में तैयार होता है। इसके फल मानसून के 4 महीने में हर 40 दिनों के अंतराल में पकते हैं। इसका एक फल का वजन औसतन 100 से 300 ग्राम तक होता है। इसका एक बार पेड़ 20 साल तक फल देता है। ड्रैगन फ्रूट यूनिटी बूस्टर है, इसलिए यह 500 रुपए किलो तक बिकता है। किसान इसकी खेती कर सालाना लाखों रुपए कमा सकते हैं। इस दौरान उन्होंने नागराज नखत के द्वारा लागए गए ड्रेगन फ्रूट के बगान को देखा । वही नागराज नखत ने 2014 से लगाये ड्रेगन फ्रूट के पोधे को उन्हें दिखाया । इस दौरान श्री नागराज ने कई शंकाओं को निदेशकउद्यान के समक्ष रखा, जिसमे ड्रेगन फ्रूट किसानो की उन्नत फसल के लिए प्रशिक्षण की बात शामिल थी । वही उद्यान निदेशक नंदकिशोर ने बतया की कृषि महाविद्यालय आरार्बाडी में भी ड्रेगन फ्रूट को लेकर शोध हो रहा है, वही उन्होंने बिहार में ड्रेगन फ्रूट के पहले किसान नागराज नखत को इस फल के उत्पादन के लिए साधू वाद दिया ।

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