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हल्के बारिश एवं हवाओं के बीच दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा व अर्चना देवीगंज तरुण संघ द्वारा की गई

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live aap news : खोरीबाड़ी । खोड़ीबारी प्रखंड अंतर्गत देवीगंज के स्थानीय बंगाली समुदाय द्वारा किये जाने वाले दुर्गा पूजा अपने आप मे काफी महत्व रखता है । देवीगंज तरुण संघ द्वारा आयोजित इस दुर्गा पूजा की शुरुआत 1996 में की गई थी । सोमवार को हल्के बारिश एवं हवाओं के बीच दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा व अर्चना देवीगंज तरुण संघ द्वारा की गई । नवरात्रि पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की विशेष आराधना की गई । इन नौ दिनों में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है, इसे दु्र्गाष्टमी भी कहा जाता है। महागौरी के पूजा के उपरांत देवीगंज के बंगाली समुदाय के श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पांजलि की रस्म की गई । बंगाली समुदाय के लोगों द्वारा अष्टमी के दिन अष्टमी पुष्पांजलि का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सभी लोग दुर्गा को फूल अर्पित करते हैं। इसे मां दुर्गा को पुष्पांजलि अर्पित करना कहा जाता है। बंगाली चाहे किसी भी कोने में रहे, पर अष्टमी के दिन सुबह-सुबह उठ कर दुर्गा को फूल जरूर अर्पित करते हैं। 
देवीगंज तरुण संघ द्वारा आयोजित होने वाली दुर्गा पूजा देवीगंज वासियों के लिए अति महत्वपूर्ण पूजा है । जहाँ माँ दुर्गा के दर्शन हेतु न सिर्फ स्थानीय बल्कि देवीगंज से सटे गलगलिया, पड़ोसी देश नेपाल व बंगाल के विभिन्न भागों से काफी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा पूजा-अर्चना हेतु लगता है । नेपाल व बिहार सटे होने कारण संध्या के समय श्रद्धालुओं का जन-सैलाब यहाँ की पूजा देखने एवं माता के दर्शन हेतु उमड़ जाते हैं । अष्टमी व नवमी तिथि को श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ होने के कारण खोड़ीबारी थाना पुलिस भी दिन से ही सक्रिय दिखी । वहीं देवीगंज तरुण संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार घोष ने बताया कि बजट के अनुसार पूजा की सारी तैयारियां की गई है । राज्य सरकार से भी साठ हजार का आर्थिक सहयोग देवीगंज तरुण संघ को प्राप्त हुआ है । मद्देनजर पूरे देवीगंज बाजार को आकर्षक लाइट के द्वारा सजा दिया गया है ताकि पंडाल में माँ दुर्गा के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं को कोई कष्ट न हो । पूजा कमिटी के सचिव वीरेन साह, कोषाध्यक्ष संजय घोष, सदस्य के रूप में संजीव आईच, सुशील घोष, मुन्ना सिंह, श्यामल गणेश, काली पदो घोष, रनों दास, मिंटू देवनाथ, संजय कुमार घोष, अरुण कुमार घोष, मुकुल वराई आदि पूजा की तैयारियों के मद्देनजर काफी सक्रिय दिखे । वहीं अष्टमी एवं नवमी के दिन संध्या समय यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ आरती प्रतियोगिता भी आयोजित होती है। वास्तव में देखा जाय तो दुर्गा पूजा पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जाती है । लेकिन पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा आंखों के सामने नजर आने लगते हैं भव्य पंडाल, पूजा की पवित्रता, रंगों की छटा, तेजस्वी चेहरों वाली देवियां, सिंदूर खेला, धुनुची नृत्य और भी बहुत कुछ ऐसा दिव्य और अलौकिक जो शब्दों में न बांधा जा सके। 

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