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Malda : मजदूर की मौत , ट्रेन से गिरकर प्रवासी मजदूर की मौत

live aapnews : विन्ह राज्य में ट्रेन से गिरकर प्रवासी मजदूर की मौत, शव लौटाने के लिए आगे आए हिंदू-मुसलमान दोनों समुदाय, अंतिम संस्कार में दिखी साम्प्रदायिक सौहार्द की आखरी मिसाल, फूट-फूट कर रोया परिवार मालदा हरिश्चंद्रपुर थाना क्षेत्र के गरगारी गांव निवासी चंदन महालदर लॉकडाउन में नौकरी गंवाने के बाद अन्य राज्य से घर लौटा था। उसने गांव के साहूकार से ब्याज पर ऋण लेकर क्षेत्र में सब्जियां बेचने का व्यवसाय शुरू किया। लेकिन लॉकडाउन और कोरोना महामारी के चलते कारोबार ठप हो गया। परिणाम वह ब्याज पर ली गई राशि का भुगतान नहीं कर सका। सात दिन पहले अपने पुराने काम पर लौटने के लिए बैंगलोर रवाना हुआ। लेकिन सिकंदराबाद स्टेशन के पास पहुंचने में ट्रेन से गिरकर चंदन की मौत हो गई। उसके निधन की खबर गांव में पहुंचने पर इलाके में मातम छा गया। वहां स्थानीय पुलिस की निगरानी में चंदन के शव का पोस्टमार्टम किया गया। लेकिन वहां से हरिश्चंद्रपुर लौटना मुश्किल है। शव को एंबुलेंस में लाने से 90 हजार रुपये खर्च होंगे। इसलिए हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग गरीब दिहाड़ी मजदूर चंदन महालदर के शव को पैतृक गांव लाने के लिए आगे आए। आखिरकार चंदन का शव आज शनिवार को घर लौटा तो पूरा गांव रो पड़ा। चंदन के अंतिम संस्कार में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। उनके मुस्लिम पड़ोसी उन्हें अपने कंधों पर उठाकर श्मशान घाट तक ले गए। अफसोस राज्य में रोजगार की कमी के कारण एक अन्य प्रवासी श्रमिक की असमय मृत्यु हो गई।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक चंदन को एक बेटा और दो बेटियां हैं। सभी नाबालिग है। चंदन के पिता अर्जुन महालदर की दो साल पहले लॉकडाउन में बिना इलाज के मौत हो गई थी। बूढ़ी मां सारथी महालदर बाजार का चक्कर लगाकर सब्जी बेचती थीं। अब तक उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। वह लंबे समय से बीमार हैं। लॉकडाउन से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। साहूकार से लिए गए ऋण का भुगतान करने के लिए श्रमिक को काम करने के लिए अन्य राज्य लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन किस्मत की विडम्बना कि रास्ते में गरीब दिहाड़ी मजदूर चंदन की ट्रेन से गिरने से मौत हो गई।