दो साल पहले दिल्ली भेजा गया था रनाघाट–मालदा MEMU प्रस्ताव, अब भी फाइलों में दबा
रेल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उठे गंभीर सवाल
रनाघाट–मालदा टाउन रूट पर नई MEMU (मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) ट्रेन शुरू करने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इस प्रस्ताव के सामने आते ही रेल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। रेल सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव लगभग दो साल पहले ही रेलवे बोर्ड (दिल्ली) भेज दिया गया था, लेकिन आज तक इस पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
प्रस्ताव में मुरशिदाबाद और अजीमगंज के रास्ते दो जोड़ी MEMU ट्रेनों को चलाने की विस्तृत योजना शामिल थी। इसमें संभावित समय-सारणी, ठहराव वाले स्टेशन और यात्री सुविधाओं का पूरा खाका भी मौजूद था। बावजूद इसके, यह महत्वपूर्ण यात्री सेवा अब तक कागजों में ही अटकी हुई है।
हैरानी की बात: अधिकारियों को भी जानकारी नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मालदा डिवीजन के कई रेलवे अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें इस प्रस्ताव की कोई जानकारी ही नहीं है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतने समय तक यह फाइल कहां दबाकर रखी गई?
इस संबंध में मालदा डिवीजन के डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) मनीष कुमार गुप्ता ने कहा कि उन्हें इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं है, लेकिन वे मामले की जांच कर आवश्यक जानकारी जुटाने का आश्वासन देते हैं।
क्या थी प्रस्तावित समय-सारणी
प्रस्ताव के अनुसार, रनाघाट–मालदा टाउन रूट पर दो जोड़ी MEMU ट्रेनें चलाने की योजना थी।
मालदा टाउन से रनाघाट
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एक ट्रेन सुबह 6:40 बजे मालदा टाउन से चलकर 12:20 बजे रनाघाट पहुंचती।
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दूसरी ट्रेन रात 8:50 बजे चलकर लगभग 2:50 बजे रनाघाट पहुंचने की योजना थी।
रनाघाट से मालदा टाउन
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एक ट्रेन सुबह 6:30 बजे रनाघाट से चलकर 12:20 बजे मालदा टाउन पहुंचती।
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दूसरी ट्रेन 2:50 बजे दोपहर में चलकर 8:50 बजे रात में मालदा पहुंचती।
इन MEMU ट्रेनों का ठहराव कृष्णनगर सिटी जंक्शन, बहारमपुर कोर्ट, मुरशिदाबाद, अजीमगंज जंक्शन, जंगीपुर रोड, न्यू फरक्का जंक्शन सहित कई प्रमुख और छोटे स्टेशनों पर प्रस्तावित था।
फॉलो-अप की कमी बनी बाधा
रेल महकमे के एक वर्ग का मानना है कि प्रस्ताव भेजे जाने के बाद व्यापारिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से मजबूत फॉलो-अप नहीं हुआ, जिसके कारण रेलवे बोर्ड ने भी इसमें खास रुचि नहीं दिखाई। नतीजतन, यह अहम यात्री सेवा फाइलों में ही अटकी रह गई।
व्यापारियों और आम लोगों में नाराजगी
मालदा आम व्यापारी संघ के सचिव उज्ज्वल साहा ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि प्रस्ताव दिल्ली तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार, MEMU ट्रेन शुरू होने से मालदा, मुरशिदाबाद और नदिया जिलों के यात्रियों के साथ-साथ व्यापारियों को भी बड़ा लाभ होता और कृषि उत्पादों का परिवहन आसान बनता।
आम यात्रियों में भी गहरी नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि पिछले दो वर्षों में सांसदों और विधायकों ने क्या किया? इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर कोई आंदोलन या दबाव क्यों नहीं बनाया गया?
मालदा मर्चेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जयंत कुंडू ने रेलवे अधिकारियों से इस विषय पर बातचीत करने की बात कही। वहीं टीएमसी नेता और पूर्व आईपीएस प्रसून बनर्जी ने आरोप लगाया कि मालदा के बीजेपी नेता केवल पुरानी और स्पेशल ट्रेनों के उद्घाटन तक सीमित हैं, जबकि जिले की वास्तविक जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
दक्षिण मालदा बीजेपी जिला अध्यक्ष अजय गांगुली ने कहा कि उन्हें इस प्रस्ताव की जानकारी नहीं है, लेकिन वे मामले की जांच करेंगे।
जनता की उम्मीदें अब भी कायम
नदिया, मुरशिदाबाद और मालदा—इन तीन जिलों के बीच रोज़ाना हजारों लोग यात्रा करते हैं। उनके अनुसार, रनाघाट–मालदा MEMU ट्रेन शुरू होने से ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, छात्र और व्यापारी सभी को बड़ी सुविधा मिलती।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह MEMU ट्रेन प्रस्ताव एक बार फिर फाइलों में ही दबा रह जाएगा, या प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर इसे ज़मीन पर उतारेंगे?
जवाब का इंतज़ार पूरे इलाके की जनता कर रही है।










